नमस्कार दोस्तों, मैं आज आप सभी के लिए अपनी पहली चुदाई की सच्ची कहानी लिख रहा हूँ और मैं बहुत सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ रहा हूँ, मुझे ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है और बहुत मज़ा भी आता है। पहले मैं सोचता था कि यह कहानियाँ सच्ची नहीं होती, सभी लोग ऐसे ही झूठी कहानियाँ लिख देते है, लेकिन जब मेरे साथ भी ऐसी ही एक घटना हुई तब से मुझे सभी कहानियाँ सच्ची लगने लगी है। मैं हरियाणा के एक गावं मैं रहता हूँ, मेरी उम्र 19 साल है, लेकिन मैंने 18 साल की उम्र से ही मुठ मारना शुरू कर दिया था। मैं जब 18 साल का हुआ तब तक मेरे अंदर बहुत कमज़ोरी आ गयी थी, मुझे बहुत बार चक्कर आने लगे थे, लेकिन मुझे पता नहीं क्या हुआ भगवान को मुझ पर दया आ गई और एक साल के अंदर मेरा शरीर बहुत अच्छा हो गया था और इस एक साल मैं मेरा वजन भी 19 किलो बढ़ गया था और अब मैं पहले से भी बहुत अच्छा दिखने लगा था और बहुत सी लड़कियां भी मेरी तरफ देखने लगी थी।

वो सर्दी का समय था और तब एक दिन मेरी भाभी (मेरे चचेरे भाई की पत्नी) घर पर आ गई, जो कज़िन के साथ बाहर रहती थी। उस पर मेरी नज़र तब से ही थी, जब उसकी नई नई शादी हुई थी और मैं हमेशा से उसको पटाने के चक्कर मैं था, लेकिन ना जाने क्यों मेरी बिल्कुल भी हिम्मत ही नहीं होती थी। मुझे पता चला कि वो अब यहीं पर रहने वाली है और अब की बार वो भाई के साथ मैं नहीं जाएगी तो मैं यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और अब मैं अपने भाई अशोक के जाने इंतजार करने लगा, लेकिन इस बीच मैं अपनी भाभी से जानबूझ कर बहुत करीब आने लगा और उनको अपनी बातों मैं फंसाने लगा। वो समय भी आ गया जिसका मुझे बहुत समय से इंतजार था और अशोक अपनी नौकरी पर चला गया। मैं आप लोगों को अपनी भाभी के बारे मैं पूरा विस्तार से बताता हूँ। उनका नाम अनीता है और वो बहुत सुंदर है और उनका वजन करीब 50 किलो और उनकी लम्बाई 5.4 है, उनकी उम्र 23 साल है, लेकिन फिगर के साईज़ का मुझे पता नहीं, क्योंकि मैंने कभी नापा नहीं और नापकर करना भी क्या था? मुझे तो बस उन्हें चोदने से मतलब था। अशोक के चले जाते ही मैं अनीता को चोदने का प्लान बनाने लगा। मैंने अब उसके साथ थोड़ी ज्यादा शरारत करनी शुरू कर दी, कभी मैं उसके कंधे पर हाथ रख देता तो कभी उसको पीछे से एकदम पकड़कर भीच देता, लेकिन मेरी इस हरकत से वो बुरा नहीं मानती, इसलिए मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई। एक दिन मैंने उसकी गांड पर हाथ लगा दिया तो उसने थोड़ा मेरी तरफ घूरकर देखा, लेकिन कुछ नहीं बोली। मुझे लगने लगा कि अब की बार तो मेरी बात बन ही जाएगी।

अगले दिन शाम को मैंने उसको जबरदस्ती पकड़कर किस करने की कोशिश की, लेकिन उसने नहीं करने दिया और वो मुझसे बहुत गुस्से मैं बोली कि यह तेरी क्या हरकत है? क्या तुझे बिल्कुल भी शरम नहीं आती? तो मैं चुपचाप वहां से चला गया और अगले दिन सुबह वो घर पर बिल्कुल अकेली थी तो मैंने मन ही मन सोचा कि चलो आज इस मौके का फायदा भी उठा लेता हूँ और जब मैं उसके पास गया तो वो मुझसे बोली कि यहाँ पर मेरे पास बैठ और मैं बैठ गया। अब वो मुझसे बोली कि मैं कई दिनों से तुझे देख रही हूँ, तू किस चक्कर मैं पड़ा है। वो बोली कि तुझे का शरम नहीं आती ऐसा करते हुए? वो बोली कि कंधे पर हाथ रखने तक तो ठीक था, लेकिन तूने तो अब बिल्कुल हद ही कर दी, कभी कहीं हाथ लगाता है, कभी कहीं, तुझे क्या शरम नहीं आती? मैं तेरी भाभी लगती हूँ और वो उस समय बहुत गुस्से से बोल रही थी और वो मुझसे पूछने लगी कि क्यों कर रहा है तू ऐसा? तो मैंने कहा कि मुझे तू बहुत अच्छी लगती है इसलिए। अब वो बोली कि और मुझे तेरा भाई अच्छा लगता है और तू मुझे ऐसी वैसी मत समझना। मैं अशोक से बहुत ज्यादा प्यार करती हूँ और वो भी मुझे बहुत प्यार करता है। उसकी ऐसी बातें सुनकर तो मेरा पूरा मूड ही खराब हो गया और मैं वहां से उठकर चला गया।

एक दिन सवेरे वो घर पर अकेली थी तो मैं उसके पास चला गया, वो पलंग पर बैठी हुई थी तो मैंने बहुत हिम्मत करके उसके दोनों हाथ अपने दोनों हाथों से पकड़ लिए और उसके होंठो पर किस करने लगा। करीब 3-4 सेकेंड तक उसके होंठ चूसे और उसके हाथ छोड़कर मैं जाने लगा। मैंने सोचा कि वो मुझसे बहुत गुस्सा होगी और कुछ कहेगी, लेकिन मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वो अपने होंठो को हाथ से साफ कर रही थी और मैं चला गया। वाह मुझे क्या गजब का मज़ा आया था और जब भी मुझे मौका मिलता तो मैं उसे पकड़कर उसके होंठो पर किस कर देता, लेकिन वो मेरा साथ नहीं देती थी, बस वो मुझसे छुड़ाने की कोशिश किया करती थी। अब मेरी हिम्मत दिनों दिन बढ़ती गई, क्योंकि वो यह बात किसी को नहीं बताती थी और मैं कभी कभी उसके बूब्स को भी दबा देता और उसे पीछे से कसकर पकड़ लेता, जिससे मेरा लंड खड़ा हो जाता और पीछे से उसकी गांड पर रगड़ने लगता था। बस मेरा मन करता कि अभी अपना लंड उसकी गांड मैं घुसा दूँ, लेकिन मुझे इससे ज़्यादा कुछ करने का मौका ही नहीं मिलता था, क्योंकि घर मैं हमेशा और भी सदस्य थे तो कभी रसोई मैं या कभी उसके रूम मैं मुझे थोड़ा ही मौका मिलता था।

मैं मन ही मन सोचने लगा कि अब यह मुझे जब भी अकेली मिलेगी, मैं इसे चोद दूँगा। वो दिन भी आ गया, वो उस दिन घर पर बिल्कुल अकेली थी और मैंने उसको जबरदस्ती पकड़कर बेड पर पटक लिया और मैं उसके ऊपर लेट गया, वो मुझसे छुड़ाने की बहुत कोशिश कर रही थी, लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा तो वो रोने का नाटक करने लगी और बोली कि प्लीज एक बार उठो आपकी कोहनी मेरे पेट मैं गड़ रही है तो मैंने उसे छोड़ दिया और खड़ा हुआ और वो खड़ी हुई और खड़े होते ही उसने मेरे गाल पर ज़बरदस्त तीन थप्पड़ मारे। उसने मेरा तो पूरा दिमाग़ ही हिला दिया और उससे मेरे गाल एकदम सुन हो गये थे और उसने एकदम से मुझे धक्का देकर रूम से बाहर कर दिया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। मैं वापस चला गया और अब मैंने उसे चोदने की आस ही छोड़ दी और मैंने मन ही मन सोच लिया कि यह मुझसे नहीं चुदेगी और 10 दिन तक मैंने उससे कोई भी बात ही नहीं की, वो मुझसे कुछ भी बोलती, लेकिन मैं उससे नहीं बोलता। एक दिन मुझे पता चला कि वो दोबारा घर पर अकेली है तो मैं एक बार से उसके पास चला गया। अब वो मुझसे बोली कि क्या हुआ गुस्सा खत्म हो गया? क्यों अब नहीं होना मुझसे नाराज़? तो मैं बिना कुछ बोले उसके पास बैठकर उसके गाल पर किस करने लगा, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली। ऐसे ही दोबारा मैंने उसके साथ शरारत करनी शुरू कर दी। एक दिन मैं क्रिकेट खेलकर आया और तब वो सो रही थी, उसके सर मैं दर्द था, मैं उसके पास गया और उसे जगाकर उसके चेहरे को पकड़कर उसके होंठो पर किस करने लगा। मैंने महसूस किया कि उस दिन पहली बार उसने पीछे से मेरा सर पकड़ा और किस करने मैं मेरा साथ देने लगी, उसने अपनी जीभ को मेरे मुहं मैं डाल दिया और ज़बरदस्त किस करने लगी, मुझे ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया था और किस करते वक्त मेरा लंड फटने को हो रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी नसो मैं खून बड़ी तेज़ी से बह रहा है। जब भी मैं उसे किस करता तो वो भी मेरा साथ देने लगी थी और मैं उसे अपनी बाहों मैं लेता और हम एक दूसरे से चिपककर बहुत मज़े से किस करते। हमैं बहुत मज़ा आता था, लेकिन वो अब भी चुदने को तैयार नहीं थी।

एक दिन दोबारा मुझे मौका मिला, जब घर पर कोई नहीं था तो मैंने सोचा कि चलो चोदने की कोशिश करता हूँ। मैं उसके पास गया और उसे बेड पर पटक लिया तो वो छुड़ाने लगी। मैंने उससे कहा कि प्लीज सिर्फ़ एक बार मुझे करने दो, तो वो मुझसे बोली कि नहीं बिल्कुल नहीं, जब तेरा भाई है यह सब करने के लिए, तो मैं और किसी से क्यों करवाऊँ? मैं उसे मनाता रहा, लेकिन वो नहीं मानी। मैंने उसे छोड़ दिया और वो बाहर आ गई और मुझसे कहने लगी कि तुम जाओ, मैं नहाने जा रही हूँ। मैंने उसे से पकड़ लिया और उसके बूब्स को मसलने लगा और मैं उसे बार बार कह रहा था कि बस एक बार करने दो, लेकिन वो लगातार मना करती रही। मैं उसे बाथरूम मैं ले गया और मैंने अंदर से दरवाजा बंद किया तो वो कहने लगी कि प्लीज तुम बाहर जाओ, तुम मुझे भी मरवाओगे प्लीज कोई आ जाएगा। मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा और अगर कोई आ भी गया तो उसे क्या पता कि मैं भी बाथरूम मैं तुम्हारे साथ हूँ? मैंने उसको दीवार के साथ लगा लिया और उसके ब्लाउज के हुक को खोलने लगा। मैं आज पहली बार उसके हुक खोल रहा था तो मुझसे हुक खुल ही नहीं रहा था, बहुत मुश्किल से एक खुला तो वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज ऐसा मत करो, लेकिन मैं अब उसकी कहाँ सुनने वाला था, क्योंकि मुझे बहुत मुश्किल से तो यह मौका मिला था। धीरे धीरे मैंने उसके सारे हुक खोल दिए। उसने अपनी आँखे बंद कर ली थी और उसके बिल्कुल सफेद बूब्स अब मेरे सामने थे।

मुझसे रुका नहीं गया और मैं उन्हें चूसने लगा, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। 5 मिनट बूब्स को चूसने के बाद मैंने उसकी साड़ी को उतारकर नीचे पटक दिया। उसने अपने पैर से अपनी साड़ी को एक तरफ सरका दिया और यह देखकर मैं बहुत हैरान था और मैं समझ गया कि अब तो यह भी मुझसे चुदने के लिए तैयार है। मैं उसका पेटिकोट उतारने लगा तो उसने मना कर दिया कि प्लीज अब इसको मत उतारो बस इतना ही रहने दो, मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती, मेरा मन यह सब करने के लिए तैयार नहीं है। मैं उसके पेटिकोट को नीचे से पकड़कर ऊपर उठाने लगा तो उसने अपनी आँखे बंद कर ली। मैंने देखा कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी और उसकी चूत पर बहुत बाल थे। मैंने चूत पर हाथ लगाकर देखा तो उसकी चूत अब तक बहुत गीली हो चुकी थी। मैंने सोचा कि अब और देर नहीं करनी चाहिए और मैंने अपनी बेल्ट को निकाल दिया और वहीं पर टांक दी। मैंने तुरंत अपनी पेंट को घुटनों तक उतार लिया और उसका पेटिकोट ऊपर उठाया और उसकी आँखे अभी भी बंद थी। अब मैं अपना लंड उसकी चूत मैं डालने लगा और तभी मेरा लंड फिसलकर नीचे से पीछे की तरफ निकल गया। उसने आँखे बंद किए ही अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के सही जगह पर लगा लिया और मैंने ज़ोर से धक्का देकर पूरा लंड अंदर डाल दिया। चूत गीली होने की वजह से लंड आसानी से फिसलता हुआ अंदर चला गया। अब मैंने धक्के लगने शुरू कर दिए और वो तेज तेज सांस ले रही थी और मुझे तो इतना मज़ा आ रहा था कि मैं शब्दों मैं बता नहीं सकता, क्योंकि मैं आज पहली बार चूत मार रहा था, लेकिन तब मैं समझ गया कि सभी लोग इस चीज़ के लिए क्यों मरते है?

अगले भाग में समाप्ति… साथ रहिएगा।।

इस कहानी का दूसरा भाग… चचेरे भाई की बीवी को चोदने का चक्कर – 2